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पलामू का जनसमुदाय

पलामू का जनसमुदाय मुख्यतः जनजातीय है। प्रमुख जनजातियों में खेरवार, चेरो, मुंडा, उरांव, बिरजिया और बिरहोर शामिल हैं।

खेरवार अपने-आपको सूर्यवंशी क्षत्रिय मानते हैं और अपना उद्गम अयोध्या से बताते हैं। करुसा वैवस्वत मनु का छठा बेटा था। उसके वंशजों को खरवार कहते हैं।

ऐतरेय अरण्यक में चेरों का काफी गुणगान हुआ है, यद्यपि वे वैदिक कर्मकांड में विश्वास नहीं रखते थे। चेरो अपना उद्गम ऋषि च्यवन से मानते हैं।

मुंडा खेरवारों से ही निकली जनजाति है। रामायण में उसके दक्षिण की ओर पलायन का उल्लेख है। महाभारत में मुंडों ने कौरवों का साथ दिया था और वे भीष्म की सेना में लड़े थे। 

प्रकृति के सामंजस्य में

जनजातीय विश्वास और रीति-रिवाज जंगल के प्रति लोगों के बर्ताव को निर्धारित करते हैं। पलामू के जनजातीय समुदाय पवित्र वनों की पूजा करते हैं (सरणा पूजा)। वे करम वृक्ष (एडीना कोर्डिफोलिआ)को पवित्र मानते हैं और वर्ष में एक बार करमा पूजा के अवसर पर उसकी आराधना करते हैं। हाथी, कछुआ, सांप आदि अनेक जीव-जंतुओं की भी पूजा होती है। इन प्राचीन मान्यताओं के कारण सदियों से यहां की जैविक विविधता पोषित होती आ रही है।

क्विज़

पलामू में पवित्र वनों की पूजा को किस नाम से जाना जाता है?

सरणा पूजा
वन पूजा

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